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Vivek Agarwal

Romance

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Vivek Agarwal

Romance

ग़ज़ल - आग अब इतनी मेरे दिल में जला करती है

ग़ज़ल - आग अब इतनी मेरे दिल में जला करती है

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आग अब इतनी मेरे दिल में जला करती है

सर्द रातों में भी गर्मी सी लगा करती है


हम वही टूटा हुआ सपना सजाये बैठे

और वो रोज़ नए ख़्वाब बुना करती है


क्या हो गर मैं भी कभी उस को यूँ रुसवा कर दूँ

पर मोहब्बत तो मोहब्बत ही किया करती है


जिंदगी और कोई मोड़ भी ले सकती थी

पर जो किस्मत हो वही राह दिखा करती है


मैं किसी और को क्या दोष दूँ इस दुनिया में

मेरी तन्हाई भी मुझ से ही गिला करती है



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