STORYMIRROR

Satyendra Gupta

Inspirational

4  

Satyendra Gupta

Inspirational

घड़ी और गरीब मध्यम परिवार

घड़ी और गरीब मध्यम परिवार

1 min
330


घड़ी की सुई को देखो

कितनी प्यारी लगती है


टिक टिक करते करते

समय की पहचान कराती है।


छोटी हूं मैं सेकंड की सुई कहलाती हूं।

नहीं किसी से मतलब मुझको

अपनी धुन चलती जाती हूँ।


छोटी इकाई को कोई नहीं समझता

पर इसके बिना कोई चल नहीं पाता है।

रुक जाये कुछ पल ही तो

अंधकार सा छा जाता है।


समाज का भी है हाल वही

छोटो के बिना ना कोई सही

मध्यम समाज अड़ जाये अगर तो

पूँजीपति एक कदम ना चल पायेगा

अमीरी का दम्भ भरने वाले

उनपर कंगाली सा छा जायेगा।


सेकंड की सुई के बिना

मिनट और घंटा की सुई अधूरे हैं

मान सम्मान दो हर तबके को

इनके बिना कहाँ वो पूरे हैं।


सेकंड की सुई की मेहनत सबको दिखता है

जिसका फल घंटे और मिनट को मिलता है

गरीबो का मेहनत भी सबको दिखता है

जिसका फल अमीरों को मिलता है

जिसका फल अमीरों को मिलता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational