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Navin Madheshiya

Tragedy

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Navin Madheshiya

Tragedy

एक फूल

एक फूल

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है वह गुज़री हुई फूल

 जिसे गिरा दिया उन निष्ठुर हाथों ने

 या नहीं सह सकी मार उन हवाओं का

 या रौंद दी गई हो पैरों से

थी अभिशप्त पर मासूम

 नहीं बचा पाई उनसे अपने आप को

 है वह आधी कुचली आधी छितराई

 जैसे कि हो प्रयास खुद को बचाने की

 पर नहीं बचा पाई अपने आप को

 दे रहे हैं गवाही उन जूतों के निशान

 थे वो कौन से राही जिसने इन्हें दिया रौद

 शायद दिया एक प्रेमी ने यह फूल

 अपनी प्रेमिका को उपहार में

 जिसे प्रेमिका ने ठुकरा दिया हो

 और दिया हो अपने पैरों से कुचल



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