एक फौज्जन की दिल-ए-दास्ताँ
एक फौज्जन की दिल-ए-दास्ताँ
बेफ़िक्र रहती हूँ मैं
जब तू होता है साथ मेरे
हर उलझन को सुलझाने का
हर तरक़ीब होती है पास तेरे,
रूठती भी हूँ इसीलिए
तू जो मनाता है इतने प्यार से
ज़िद भी करती हूँ सिर्फ तुझसे
क्योंकि तू उस प्यार की
ज़िद को है पहचानता मेरे,
कोशिश करती हूँ मैं खुद में बहुत
ना आये ये आँसू बेवजह यूँ हर पहर
जानती हूँ कि तू है एक देश रक्षक
पर क्या करूँ मैं भी हूँ
उस रक्षक की पूजक,
तेरे संग सात फेरे ले
तुझे सात वचन जो दिया है
हर पल तेरी ढाल बनूँगी
खुद में ही ये प्रण किया है,
सीमा प्रहरी है तू जो देश का
तू भी अपना बेफ़िक्र फ़र्ज़ निभाए
हूँ मैं भी खड़ी यहाँ परिवार संभाले
बस तू वापस आने का एक वादा तो कर दे,
हर पल एक डर यहाँ
जो हर रोज़ सताता है
सही सलामत ही आओगे ना
यही सोच बेवज़ह मन घबराता है,
महीनों इंतज़ार का मतलब क्या होता है
ये हर फ़ौजी बीवी जानती होगी
हर दिन हर लम्हे को कैसे दिल में छुपा
परिवार के सामने हँसके आती जो होगी।

