STORYMIRROR

Avneet kaur

Abstract

3  

Avneet kaur

Abstract

एक किताब

एक किताब

1 min
261

एक किताब की तरह होती है ज़िन्दगी

पिछले पन्ने पढ़ते हैं तो ज़ख्म गहरे होते हैं

आगे वाले पन्ने पढ़ने का साहस नहीं होता

बस एक सर्कस के जोकर की तरह बन कर रह गई है ज़िन्दगी


एक किताब की तरह होती है ज़िन्दगी

कभी हँसती है तो कभी रुलाती है

कभी जीने तो कभी मरने के लिए कहती है

बस एक बिन पानी के पौधे की तरह बन कर रह गई है ज़िन्दगी


एक किताब की तरह होती है ज़िन्दगी

कभी मशहूर तो कभी बदनाम करती है ज़िन्दगी

कभी दर्द देती है तो कभी मरहम बनती है

बस एक अधूरे दिल की दास्ताँ बन कर रह गई है ज़िन्दगी


एक किताब की तरह होती है ज़िन्दगी

कभी एक को दूसरे से दूर तो कभी पास लाती है

कभी बच्चे को दुनिया और बूढ़े को शमशान लाती है

बस एक बिन स्याही की कलम की तरह बन कर रह गई है ज़िन्दगी!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract