एक जमाना था
एक जमाना था
एक जमाना था
जो अब इतिहास हो चुका है
जब कम बोलनेवाले
ज्यादातर चुप्पी रहने को
साधना करने वाले
सत्य और शांति के पुजारी
कर्मयोगी, ज्ञानी लोगों को
लोग समाज के नेता मानते थे
समाज में उनके कदर था
लोग उन्हें अपने आदर्श मानते थे
पर अब का हाल कुछ और है
मेरे भाई !
अब तो चुप्पी साधने वाले
अपने शब्द, कर्म ओर सत्य को
सम्मान देने वाले लोगों को
नेता नहीं ,वल्कि
शब्दों के खिलाड़ी
सपनों के सौदागर
भाषणवाज बहुरूपिएं
अभिनेताओं को लोग नेता
समझने लगे हैं
और काफी कदर है
उनके आज के समाज में
क्योंकि आज जमाना बदल चुका है
लोगों के सोच ,विचार
यहां तक खून भी
आज के बदलती हालात में
जहरीला नीला हो चुका है
आगे क्या होगा ईश्वर जाने ?
