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Prashant Srivastava

Classics

4  

Prashant Srivastava

Classics

एक दिन हम इतिहास बन जायेंगे।

एक दिन हम इतिहास बन जायेंगे।

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एक दिन हम इतिहास बन जायेंगे।
क्या हम याद रखे जायेंगे?
यह प्रश्न, यह सत्य।
क्या हम याद रखे जायेंगे?
विश्व पटल पर आना एक उपलब्धि है,
तो विदा होना भी एक अवसर है।
कुछ पल हमने बिताया, कुछ खोया, कुछ पाया।
संजोए सपने, कुछ अपने, कुछ बिखराए।
कुछ अमिट छाप छोड़ हमने,
क्या हमारे पदचिह्न पहचाने जायेंगे?
क्या हम याद रखे जायेंगे?
एक दिन हम भी इतिहास बन जायेंगे।
दिवस, मास, वर्ष बीत रहे,
बदल रहा सब कुछ पल-पल।
हम क्या स्थिर होकर रह पाएंगे?
कभी करना, कुछ नया करना—
यह सृजन देगा एक पहचान।
भले ही हम याद न रखे जाएं,
पर मेरा सृजन देगा एक नया पथ।
आये उस पथ से अनेक, अवश्य कुछ पायेंगे।
शायद उस पथ पर हम याद रखे जायेंगे।
भले ही हम सूक्ष्म पर अंश हैं इस ब्रह्मांड के,
फैलते जाना हमारी नियति।
एक दिन हम भी बिखर जायेंगे।
हमारी संचित ऊर्जा, हमारी ताकत,
बिखर कर भी कुछ कर जायेगी,
कुछ नया कर जायेगी।
(दूसरा भाग)
मेरे पदचिह्न चिर काल तक देखे जायेंगे।
भले ही हमें याद न रखा जाये,
पर प्रकृति के दिल में उतर कर
हम हर पल मुस्करायेंगे।
कभी फूलों में, कभी भोरों में,
कभी पता नहीं किस रूप में,
हम इस मिट्टी से नये सृजन में आयेंगे।
हम खत्म न होंगे कभी,
हम भले सूक्ष्म हो जायेंगे।
खुद की यादों में, हम खुद का ढूंढ,
अपने हर नये रूप में, कुछ नया कर जायेंगे।
हम सही हैं हर पल के,
हर पल में, अनंत काल तक याद रखे जायेंगे।
एक दिन, हम भी इतिहास बन जायेंगे क्या हम याद रखे जायेंगे?
विश्व पटल पर आना एक उपलब्धि है, तो विदा होना भी एक अवसर है।
कुछ पल हमने बिताया, कुछ खोया, कुछ पाया।
संजोए सपने, कुछ अपने, कुछ बिखराए।
कुछ अमिट छाप छोड़ हमने, क्या हमारे पदचिह्न पहचाने जायेंगे?
क्या हम याद रखे जायेंगे?
 एक दिन हम भी इतिहास बन जायेंगे।
दिवस, मास, वर्ष बीत रहे, बदल रहा सब कुछ पल-पल।
हम क्या स्थिर होकर रह पाएंगे?
कभी करना, कुछ नया करना— यह सृजन देगा एक पहचान।
भले ही हम याद न रखे जाएं, पर मेरा सृजन देगा एक नया पथ।
 आये उस पथ से अनेक, अवश्य कुछ पायेंगे। शायद उस पथ पर हम याद रखे जायेंगे।
 भले ही हम सूक्ष्म पर अंश हैं इस ब्रह्मांड के, फैलते जाना हमारी नियति।
एक दिन हम भी बिखर जायेंगे।
हमारी संचित ऊर्जा, हमारी ताकत, बिखर कर भी कुछ कर जायेगी, कुछ नया कर जायेगी।  मेरे पदचिह्न चिर काल तक देखे जायेंगे।
भले ही हमें याद न रखा जाये, पर प्रकृति के दिल में उतर कर हम हर पल मुस्करायेंगे।
कभी फूलों में, कभी भोरों में, कभी पता नहीं किस रूप में, हम इस मिट्टी से नये सृजन में आयेंगे।
हम खत्म न होंगे कभी, हम भले सूक्ष्म हो जायेंगे।
खुद की यादों में, हम खुद का ढूंढ, अपने हर नये रूप में, कुछ नया कर जायेंगे।
हम सही हैं हर पल के, हर पल में, अनंत काल तक याद रखे जायेंगे।
 एक दिन, हम भी इतिहास बन जायेंगे


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