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Prashant Srivastava

Classics

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Prashant Srivastava

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हरे कृष्णा हरे राम

हरे कृष्णा हरे राम

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हरे कृष्णा हरे राम

जब मन हो अशांत, न सूझे कोई राह।

बोलो हरे कृष्णा हरे राम, हरे कृष्णा हरे राम॥

या बोलो अल्लाह हो अकबर, जो भी हो तेरा विश्वास

दिल पर रखकर हाथ, होकर बिल्कुल शान्त

रखो स्वयम् पर विश्वास, बोलो हरे कृष्णा हरे राम।

क्यो बँटे हो तुम, ईश्वर के भेजे मानव हो तुम

ना तेरी कोई जाति, ना कोई तेरा धरम

करो अपना करम, केवल मानवता तेरा धरम।

खुद पर रखो विश्वास, बोलो हरे कृष्णा हरे राम।

ईश्वर अल्लाह एक ही नाम, मत सोचो दूजा नाम॥

मन तो चंचल है, दिखाये ढेरो राह।

बोलो हरे कृष्णा, हरे राम

मत भटको तुम, चुनो तुम अपनी राह।

नीत नई चुनौतियाँ आयेंगी, कुछ सिखायेगी।

हर पल है एक संघर्ष, बढ़ो आगे न सोचो

होगा क्या कल।

पल-पल की कीमत है, श्वाँसे भी सीमित है।

रोने से क्या फायदा, हँसते रहो, सोचो मत होगा

क्या कल।

दुनियाँ में आये हो, अपनी किस्मत लाये हो।

दूसरो में खुद को क्यो ढूँढे, क्यो उलझे क्यो रुके।

चलते रहना तेरा काम, बोलो हरे कृष्णा, हरे राम

या बोलो अल्लाह हो अकबर, जो भी हो तेरा

विश्वास।


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