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Rajeev Rawat

Tragedy Inspirational

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Rajeev Rawat

Tragedy Inspirational

एक और यथार्थ - - दो शब्द

एक और यथार्थ - - दो शब्द

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जलती हुई मोमबत्ती 

अपनी कंपकंपाती लौ से तिमिर को हटाने की कोशिश में लगी थी-

उस अंधेरी रात में काट रहे थे अकेलेपन के खटमल, 

और तन्हाई की वेदना में उसकी आंखें जगी थी-


एक चारपाई, 

एक तकिया और आवरण हीन रजाई-

एक घड़ा, एक मग, चपटी हुई थाली, दरवाजे की दरारों से आती हवा, बस यही थी उसके अंतिम घड़ी की कमाई-


अपनी हालत देखकर उसे लगा कि 

जलती हुई मोमबत्ती थोड़ा थोड़ा मुस्करा रही है-

और आहिस्ता आहिस्ता जलते हुए भी

जीवन का एक यथार्थ दिखला रही है-


रे मानव 

आज तू अपनी इस हालात पर रो रहा है-

तूने जिंदगी भर जिनके लिए अपने को लुटा दिया

उनकी यादों में अब भी खो रहा है-


मैं एक बात करूं अर्ज - 

भूल जा तूने किसके लिए क्या किया

यह बदले में कुछ चाहत की भावना छोड़ कर मेरी तरह सोच की वह था तेरा फर्ज - 

गर सोचता रहा सूदखोरों की तरह कि संबधो को दिया गया वक्त, धन, या अहसास था तेरा कर्ज - 

तब तू भी औरों की तरह कहलायेगा खुदगर्ज-

और ताजिन्दगी उठाता रहेगा दर्द - 


मुझे देख

तेरा तिमिर दूर करने के लिए जल रहीं हूं-

पल पल जलते - पिघलते अपने अस्तित्व को खो रही हूं-

जब दर्द की इंतहा हो जाती है तो आंसु की बूदों की मानिंद धीरे धीरे छलक रहीं हूं-

मेरे ढलके हुए आसुंओ को निर्जीव मोम समझ कर

एक बार फिर धागे की बत्ती लगाकर तू जला देगा-

मेरे दर्द के अहसास को न समझेगा

बस अपना अंधेरा कुछ पलों के लिए दूर भगा लेगा-


यही है जिन्दगी का सत्य 

जब तक तू किसी की जिंदगी को रोशन करने के लिए जलता रहेगा - 

जब तक किसी काम आता रहेगा और दूसरों के लिए मरता रहेगा-


तेरे दर्द को कोई नहीं समझेगा कि

तेरी अंतरात्मा भी किसके के लिए और दर्द में कितना रोती है-

तभी तक तेरी कीमत है, जब रोशनी देने की तेरी औकात होती है।

                

    


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