Anand Kumar
Romance
लिखा है मैंने ये
एक और नज़्म
तेरी तारीफ़ में,
कि, पेश है एक बार फिर
एक नई कोशिश मेरी,
आज तेरी ख़िदमत में
पर आज ये नज़्म भी
बार बार पूछ रहा मुझसे,
कभी अपने लबों से
पढ़ दे तू इसे,
ऐसा मुबारक लम्हा
क्या है मेरी किस्मत में ?
वो नज़्म
सुखदेव थापर
तुम मेरे बसंत...
कविताएँ हाला ...
।ये दिल नहीं ...
जग सुन्दर लगत...
उसकी 'ना'
उससे जुदाई
मैं तुमसा हो...
कितना प्यार क...
गोरी का मुख देखकर, मन में उठे तरंग, लाल-गुलाबी प्रीत के, चढ़े अनेको रंग, बढ़ा रहे सौंदर्य को, हाय! अ... गोरी का मुख देखकर, मन में उठे तरंग, लाल-गुलाबी प्रीत के, चढ़े अनेको रंग, बढ़ा रह...
लीजिये आपकी किस्मत उतार दी कानों से, पर सुनिये सब कहते हैं मेरे कदम शुभ है..! लीजिये आपकी किस्मत उतार दी कानों से, पर सुनिये सब कहते हैं मेरे कदम शुभ है....
कुछ न लिखकर तुमने, मन का दरपन भेजा है ! सूने मन का सूना जीवन, हाल सारा लिक्खा है !! कुछ न लिखकर तुमने, मन का दरपन भेजा है ! सूने मन का सूना जीवन, हाल सारा लिक्खा...
मैं शुरू से अंत तक सिर्फ तुमसे प्रेम करना चाहती हूँ। मैं शुरू से अंत तक सिर्फ तुमसे प्रेम करना चाहती हूँ।
सदियों से देखो कुछ कदमों की दूरी लाँघकर फासले तय कर लो कहीं इस बार भी ना खो दूँ तुम्हें। सदियों से देखो कुछ कदमों की दूरी लाँघकर फासले तय कर लो कहीं इस बार भी ना खो दू...
चेहरे की ज़मीन से फिसलकर आंखो के कुएं में एक रस्सी उतारकर अंतस तक पहुंचना पड़ता है और बहुत ही कम... चेहरे की ज़मीन से फिसलकर आंखो के कुएं में एक रस्सी उतारकर अंतस तक पहुंचना पड़...
कोशिशें दिल को हँसाने की किये हम, पर हँसी उसको नहीं आती है तुम बिन... कोशिशें दिल को हँसाने की किये हम, पर हँसी उसको नहीं आती है तुम बिन...
लौट आई अभी अभी मिल कर आँख से आँख मशवरा कर के। लौट आई अभी अभी मिल कर आँख से आँख मशवरा कर के।
मेरी आँखों के भी तारे हो तुम। मेरी आँखों के भी तारे हो तुम।
आहत मन की बात सिर्फ इतनी तुमने पहले क्यों न कहा आहत मन की बात सिर्फ इतनी तुमने पहले क्यों न कहा
बेकल है अरमाँ और मौसम की कशिश है। बेकल है अरमाँ और मौसम की कशिश है।
वह सबको बता देना चाहती है कि वह तुमसे प्यार करती है... वह सबको बता देना चाहती है कि वह तुमसे प्यार करती है...
गीत के सुर सजे, भाव नूपुर बजे, किंतु मन में ना झंकार कोई उठी। चेतना प्राण से, वेदना गान से, प्रार... गीत के सुर सजे, भाव नूपुर बजे, किंतु मन में ना झंकार कोई उठी। चेतना प्राण से, ...
खुशबू वो रूहानी थी या मौजों की रवानी थी... खुशबू वो रूहानी थी या मौजों की रवानी थी...
नंगी कश्ती के कंधों पर चलो डाल दे पाल प्रिये बढ़ जाएंगे कुछ आगे पल ठहर तुम्हारी आँखों में। नंगी कश्ती के कंधों पर चलो डाल दे पाल प्रिये बढ़ जाएंगे कुछ आगे पल ठहर तुम्हारी ...
आपके ना होने से महफ़िलो में भी खुद को तनहा पता हूँ... आपके ना होने से महफ़िलो में भी खुद को तनहा पता हूँ...
चेहरे से चमक जो छलके, केशों से लिपट आपके, नज़रें झुका के यूँ ना सनम, मेरी जान लीजिएगा... चेहरे से चमक जो छलके, केशों से लिपट आपके, नज़रें झुका के यूँ ना सनम, मेरी जान ल...
संभलता कैसे, पहली बार जो मैंने; इश्क़ का बवंडर देखा... संभलता कैसे, पहली बार जो मैंने; इश्क़ का बवंडर देखा...
कहते हैं कि, प्यार को परवान चढ़ाने, खोया प्यार पाने, और रूठे यार को मनाने, गोवा से अच्छी... कहते हैं कि, प्यार को परवान चढ़ाने, खोया प्यार पाने, और रूठे यार को मना...
मैं तो हूँ इक टूटी नौका, बीच भँवर में अटकी हूँ; मन का चप्पू पाने खातिर मैं तो हर पल भटकी हूँ... मैं तो हूँ इक टूटी नौका, बीच भँवर में अटकी हूँ; मन का चप्पू पाने खातिर मैं तो ह...