STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

एक अशांत ज्वालामुखी

एक अशांत ज्वालामुखी

1 min
187

यह 

नागफनी के पौधे में 

फूल उग भी आते हैं लेकिन 

इस शख्स के 

दिल में तो बस 

अग्नि के अंगारे ही 

सुलगते रहते हैं 


इसके हाथों में 

फूल भी थमाओ तो 

वह भी झुलस जाते हैं

आदर भाव से 

भगवान का प्रसाद भी 

अर्पित करो तो 

वह भी 

राख के ढेर बन 

जाते हैं 


न जाने 

कौन सी 

बदले की आग में 

जल रहा है 

यह 

इसके मन में लगी आग 

किसी भी उपाय से 

शांत नहीं हो रही 


ठंडे और शीतल पानी का 

छिड़काव 

हवाओं ने छोड़ दिया बहना 

पलट दिया अपना रूख

तंग कर दिया अपना दायरा 

कर लिया इससे किनारा लेकिन 

सब व्यर्थ 


एक समय के बाद 

अधिकतर ज्वालामुखी भी शांत हो 

जाते हैं लेकिन 

यह एक ऐसे अशांत ज्वालामुखियों में से है जो 

लगातार भड़कते ही जाते हैं 

अपने साथ साथ 

दूसरों का जीवन भी 

जलाकर 

उन्हें बर्बादी की कगार पर 

पहुंचाते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy