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DR ARUN KUMAR SHASTRI

Tragedy

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DR ARUN KUMAR SHASTRI

Tragedy

एहसान तो ले ले

एहसान तो ले ले

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पैगाम तो ले ले

बेरुखी तेरी मेरी जान न ले ले 

मुँह फेर के जाने वाले, ये आखरी पैगाम तो ले ले 


आशिकी का अफ़साना कभी इक तरफा नहीं होता 

मुझको खता वार कहने वाले, पैगाम तो ले ले 


वक्त के रहते संभल जाए तो अच्छा होगा 

बरस जा मेरे अरमानो की ज़मीन पर 

इस से पहले ये फसल मुरझाये, इंतेखाब तो ले ले 


दर्द को दर्द से कभी उम्मीद कहाँ होती है 

तू मेरे लिए मरहम बन के आये ,

 फिर चाहे जान भी ले ले 


दूर रहने से कभी आग बुझा करती है औ नादान 

पास आकर कभी गले लगाए , ये एहसान तो ले ले 


यूँ तो हर किसी की मोहब्बत पूरी नहीं होती दुनिया में 

तू मेरी जिद्द को हकीकत में बदल जाए ये अंजाम तो ले ले 


मैं तिरे किरदार से बेहद से जुड़ा हूँ जन्मों से 

यक़ीन न आये तो रब के हुकुम का फरमान तो ले ले 


बेरुखी तेरी मेरी जान न ले ले 

मुँह फेर के जाने वाले, ये आखरी पैगाम तो ले ले 


आशिकी का अफ़साना कभी इक तरफा नहीं होता 

मुझको खता वार कहने वाले, पैगाम तो ले ले 


चलो माना तुझे इश्क इस अबोध से बिलकुल भी नहीं 

इंसानियत के नाते ही सही इक बार इसका सलाम तो ले ले।


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