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Shailaja Bhattad

Classics

3  

Shailaja Bhattad

Classics

दुनिया

दुनिया

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380

कच्चे धागों से बुनी दुनिया

सिलवटों में उलझी दुनिया।


हर तरफ से रिसती दुनिया

हम सब की है ये दुनिया।


हर हसरत,

हर आरजू से लदी ये दुनिया।


अविश्वास की बुनियाद पर

डोलती है दुनिया।


हर रिश्ते से छूटती दुनिया

दिवारों पर टंगी है दुनिया।


काश न होती ऐसी दुनिया।


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