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Neeraj pal

Abstract

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Neeraj pal

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दर्द।

दर्द।

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हम अपने दर्द, यही सोचकर सहलाते हैं

भेजे उनके हैं हमारे जो पास आते हैं।


शख्स कितने हैं वो, कह दे न कोई यह, इससे-

दर्द का नाम लबों तक भी ना हम लाते हैं।


जिसमें वह खुशी हो हमारी भी हो उसी में खुशी

इसी ख्याल को ले हम खुशी मनाते हैं।


हमें है फ़ख्र कि रिश्ता तो एक है कायम

फर्क क्या जालिमों- मजलुम जो कहाते हैं।


उन्होंने खाली कसम, मेरे घर ना आने की

इधर है हम जो, दौड़ -दौड़ दर पर जाते हैं।


सब्र का वह हमारे, इम्तिहान हैं लेते

जब्र का हम भी इम्तिहान लेने जाते हैं।


हमारे कूचे से थे एक दिन गए वो गुजर

इस तसव्वुर पे ही अब हम तो जिए जाते हैं।


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