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Shalini Dikshit

Tragedy

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Shalini Dikshit

Tragedy

दर्द

दर्द

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हम मन मे क्रोध लिए 

बैठे रहे।

बस कलम चला कर

चुप बैठे रहे।

नित नारी अत्याचार 

होते रहे।

हम दिल मे दर्द लिए

बैठे रहे।

कैसे रक्षा करे अपनी 

बेटियों की 

यही सवाल लिए

बैठे रहे?

जब जब जाए घर से बाहर

दिल मे डर लिए

बैठे रहे।

सभी को मिलेगी सजा,

कानून पर आस लगाए

बैठे रहे।

आखिर कब थमेगा 

यह आलम,

यही सवाल मन मे लिये

बैठे रहे।

 


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