STORYMIRROR

kalpana gaikwad

Romance

4  

kalpana gaikwad

Romance

दर्द छलक जाता हैं

दर्द छलक जाता हैं

1 min
351

तुम संग जबसे प्रीत लगाई

सारी दुनिया हुई हरजाई

जब गठ बंधन उसने जोड़ा हो

तो कैसे कोई तोड़ेगा

जब तक वो ना चाहे!!!! 


सात फेरों का ये बंधन

आखिरी साँस तक निभाऊँगी

जहाँ से भी तू पुकारेगा

मैं दौड़ी चली आऊँगी!!!! 


जबसे तू हुआ है रुखसत

जबसे निगाह तूने फेरी

कैद कर हैं दर्दे दिल को

मैंने अपने सीने में!!!!! 


जब अश्कों के सैलाब से

भर जाता हैं दिल का बर्तन

रोकूँ चाहे जितना भी

दर्द का पैमाना छलक जाता हैं!!!!!! 


समझाऊँ कितना इस पागल दिल

को, वो लौटकर कभी ना आयेगा

जिंदगी भर का गम मिला हैं

ये अश्कों में बह जायेगा!!!!! 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance