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डॉ मंजु गुप्ता

Tragedy Inspirational Others


4.4  

डॉ मंजु गुप्ता

Tragedy Inspirational Others


दोहों में पर्यावरण

दोहों में पर्यावरण

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बिगड़ गया पर्यावरण, उठते आज सवाल।

इस मानव की स्वार्थ से, प्रकृति हुई बेहाल। 1


औद्योगिक कचरा करे, जग जीवन का नाश।

जहर भरे परिवेश से, करे विकास निराश। 2


औद्योगिक कचरा बहा, करें नदी नर्जीव।

जहरीला जल को करे, बचे न कोई जीव। 3


नहीं प्रदूषित जल करो, जल सदा मूल्यवान।

जल धरती का कल बना, जल ही जीवन प्राण। 4


जब से जंगल कट रहे, बरसे न आसमान।

महमारी सूखा सदा, बुला रहा इंसान।। 5


दूषित पर्यावरण का, नर खुद जिम्मेदार।

बुला रहा बीमारियाँ, मानवता बेजार। 6


जंगल में कंक्रीट के, गई हरितिमा खोय 

सूखे खेतों को लखे, खुशहाली अब रोय। 7


छेद, परत-ओजोन से, बढ़े सूर्य का ताप।

सब जीव - जन्तु मर रहे, गर्मी, लू अभिशाप ।8


फोड़, पटाखे, चकरियाँ, मचा रहें हैं शोर।

करते ध्वनि प्रदूषण ये, करें कान कमजोर। 9


कर जंगल बर्बाद सब, बनते आज मकान।।

पड़ती कुदरत मार जब, लाती हैं तूफान।।10


काट काट कर, वृक्ष सब, करी धरा वीरान ।

फिर ग्लोबल वार्मिंग से, होते क्यों हैरान। 11


विकास के उपकरण से, होते वन बर्बाद।

संकट छाया साँस पर, रहे नहीं आबाद । 12


नदियों का गठजोड़ कर, बना रहें वे बाँध ।

उनकी रोके राह खुद , पर्यावरण सड़ाँध। 13


अगर परिवेश न सुधरा, बुरी बने तस्वीर ।

नहीं रहेगा आशियाँ ,  रोए खुद तकदीर ।14


जल ,वन, है भू-संपदा, नहीं करो बम-वार ।

ग्लोबल वार्मिंग उपजे, करे प्राण संहार। ।15


बना सुरंगें - बाँध से, नदियाँ जी जंजाल ।

कहर केदार नाथ का, आया बनकर काल। 16


सूख नदी, पोखर रहे, जल- संकट घनघोर।

तोड़े जीवन दम कभी, मचा शोर सब ओर।17


निषेध प्लास्टिक का करो, बने कड़े कानून ।

ये भू को बंजर करे, नहीं समस्या न्यून।18


चिड़िया हो गायब रहीं, फैले टावर- जाल ।

बीमारी भी बढ़ रही, बुला रहा नर, काल ।19


नस्ल- नयी को दे हम यह संतुलन उपाय।

वैदिक- संस्कृति से सदा, पर्यावरण बचाय ।20


करें खत्म पर्यावरण, दें, भू को उपहार।

छत, खिड़कियाँ, आँगन में, उगा पौध- परिवार। 21 



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