STORYMIRROR

Rajbahadur Yadav

Action

4  

Rajbahadur Yadav

Action

दो चुस्कियों की शाम

दो चुस्कियों की शाम

1 min
590

दुखित मन को तृप्त करो,

 अपने तन को तृप्त करो।

लेकर दो चुस्कियों की शाम,

ए सुहानी शाम तृप्त करो।।


यह जिंदगी संघर्ष से भरी है,

 पर बहुत उत्कर्ष से भरी है।

इसके अरमान तुम संवारो,

यह विचार विमर्श से भरी है।।


तुम सोचो यह आयाम क्यों है,

चुस्कियों की सुंदर शाम क्यों है।

व्यथित मन कहीं भटक न जाए,

जीवन संताप के अंजाम क्यों है।।


सुबह अपनी राह में जो जाए,

 और शाम चुस्कियों में खो जाए।

वही जीवन तो सही जगमगाए,

 जो विकास के बीज बो जाए।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action