STORYMIRROR

S P PANDEY

Romance

2  

S P PANDEY

Romance

दिल की बात

दिल की बात

1 min
260

मैं भी हूँ बंधन में तू भी है बंधन में

फिर क्यों दिल धड़कता है,

तेरा मुझ में मेरा तुझ में।


ना जाने कुदरत ने क्यों खेला ये खेल,

क्यों भर दिए जज्बात पहले मुझ में

फिर तुझ में।


ख़ुदा ने तुझ से गर मिलाया होता पहले ही,

मैं समा गया होता तुझ में ओर तुम मुझ में।


गर मांगने की इजाज़त होती उस ख़ुदा से,

तुझे मांग लेता मैं सच मे खैरात में।


रहना मेरे साथ ये गुज़ारिश है तुझ से,

जुदा हुई जो मुझसे मर जाऊँगा विरह में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance