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Rajit ram Ranjan

Romance


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Rajit ram Ranjan

Romance


दिल कि मुरझाई कली !

दिल कि मुरझाई कली !

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जो तूने दिया 

वो दर्द काफ़ी हैं, 

मेरे गुनाहो की 

शायद यही माफ़ी हैं !


बस मेरी ख़ामोशी को 

समझ जाना तुम, 

यूँ ही ना बैठना 

कही तन्हा गुमसुम !


ज़ब कभी बेचैनियाँ सताए 

तो मिलने चली आना, 

दिल कि मुरझाई 

कली को फिर से खिलाना !


मैं तेरे इंतजार में 

बैठा रहूंगा

प्लेटफॉर्म नम्बर तीन पे, 

जल्दी आना हम दोनों 

बैठेंगे विंडो वाली 

सीट पे !


सफर में बोर होंगे ज़ब 

तो मूवी देख लेंगे, 

दिल को गर 

कुछ ना भाया तो 

गले लगके देख लेंगे !


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