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अजय पटनायक

Inspirational

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अजय पटनायक

Inspirational

धरती करे पुकार

धरती करे पुकार

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*धरती करे पुकार*

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कर पर्यावरण पर विचार कभी,रोक प्रकृति पर अत्याचार कभी।

कहर ढा रहा है प्रदुषण सुनो धरती की पुकार तो कभी।।


हवाएं कहीं रुक जाये न कभी , फूलों की डाली झुक जाये न कभी ।

बहने दो ये पावन झोंके, रूठ कर हरियाली चली जाये न कभी।।


बहारों में खुशबु आये न कभी, फिजां मन को भाये न कभी।

खुशबु समेट लो फूलों का, धुएं में छिप जाये न कभी।।


बादलों में घटा छाये न कभी, शाम सुहानी आये न कभी।

चूम लेने दो सावन को धरती , बिन बरसे उड़ जए न कभी।।


बागों में कलियाँ खिल पाये न कभी, फूलों में भवरा गुनगुनाये न कभी।

रोक लो बसंत के बहारों को, पतझड़ में बदल जाये न कभी।।


आकाश में पंक्षी चहके न कभी, बागों में खुशबु महके न कभी।

आओ धरा को कर दें हरा, प्रदुषण में घिर जाए न कभी।।


समंदर न हो जाये विकराल कभी, नदियां न बन जाए काल कभी।

बहक न जाये सुनामी लहरें, देखो पृथ्वी का हाल तो कभी।।


धरती हो जाये बंजर न कभी, मातम का ना हो मंजर कभी।

आओ धरा का ऋण चुकाएँ ,एक एक पेड़ लगाकर कभी।

एक एक पेड़ लगाकर कभी।।


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