Anuj Bhandari
Fantasy Inspirational
सफलता अगर दूर दिखे,
तो उसे आवाज न लगाना
चुपके से उसके पास जाकर
सीने से लगा देना।
खुशी होगी कितनी
इसका अंदाजा लगाने
पहले मत बैठ जाना
बस उस वक्त,
ऊपर वाले को याद करके
धन्यवाद दे देना।
मां -बाप
इस कदर
अंगूठी
गरमागरम चाय
भरपेट थाली
लाइब्रेरी
प्यासा
दुल्हन की मौत
मनुष्य जीवन
पैगाम
कभी भी खुश नही होगी ऋषभ ये ही सच्चाई है। कभी भी खुश नही होगी ऋषभ ये ही सच्चाई है।
रानियां वीरों की बातें करती होंगी, अट्टालिका से पथ निहारा करती होंगी। रानियां वीरों की बातें करती होंगी, अट्टालिका से पथ निहारा करती होंगी।
Chahto ki bhanvar Chahto ki bhanvar
हाव भाव में चन्द्रमुखी वो, बह जाये रूप सागर में जो भी देख ले उसको हाव भाव में चन्द्रमुखी वो, बह जाये रूप सागर में जो भी देख ले उसको
थोड़ा रोमांस करते थोड़ा रोमांस करते
रात देखा मैंने चाँद को नींद की आगोश में, खिल रही थी चाँदनी, रहा ना मैं भी होश में रात देखा मैंने चाँद को नींद की आगोश में, खिल रही थी चाँदनी, रहा ना मैं भी होश...
भोर होने पर, वह फिर सूरज से डरकर, लौट जाने की जिद्द करेगा भोर होने पर, वह फिर सूरज से डरकर, लौट जाने की जिद्द करेगा
कभी नफ़रत उगलने लगते है ये क्या करे इनका, कुछ समझ नहीं आता कभी नफ़रत उगलने लगते है ये क्या करे इनका, कुछ समझ नहीं आता
हमें भी कभी तुम याद करो दो पल ठहर कर कुछ प्यारी बातें करो। हमें भी कभी तुम याद करो दो पल ठहर कर कुछ प्यारी बातें करो।
इस जहान से अलग एक जहान है, प्यार ही बस जहाँ खुदा है। इस जहान से अलग एक जहान है, प्यार ही बस जहाँ खुदा है।
कुछ ऐसा होगा हमारा नव वर्ष का आगमन कुछ ऐसा होगा हमारा नव वर्ष का आगमन
और अंदर ही अंदर हमारी रूहें, एक होकर मिलन उत्सव मना रही थी। और अंदर ही अंदर हमारी रूहें, एक होकर मिलन उत्सव मना रही थी।
सूरज की धूप को पेड़ बनकर छांव बनती एक परछाईं है वो सूरज की धूप को पेड़ बनकर छांव बनती एक परछाईं है वो
इस से भी अंजान भला क्यों? इस से भी अंजान भला क्यों?
भी दे जाएंगे बेसहारा नन्हें परिंंदे को आकाश खुला दिखाएंगे। भी दे जाएंगे बेसहारा नन्हें परिंंदे को आकाश खुला दिखाएंगे।
ह्रदय का महल ह्रदय का महल
लौटे जिससे वक्त पुराना लौटे जिससे वक्त पुराना
जब ईश्वर कुछ लेता है तो अनकहे उसकी कमी पूरी कर देता है जब ईश्वर कुछ लेता है तो अनकहे उसकी कमी पूरी कर देता है
धरती है ऊपर, आकाश जमी पे, बादलो में उड़ रही हूं मैं, धरती है ऊपर, आकाश जमी पे, बादलो में उड़ रही हूं मैं,
अब तो जन्नत में ही मुलाक़ात होगी तेरी तो 'रुह' भी मेरे पीछे आ रही है। अब तो जन्नत में ही मुलाक़ात होगी तेरी तो 'रुह' भी मेरे पीछे आ रही है।