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धड़कनों को तेरे संभाला तो होता

धड़कनों को तेरे संभाला तो होता

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गम मनाऊ तो कैसे रिश्ता तो होता
चल सके साथ मेरे फरिश्ता तो होता
गया छोड़ दुनिया वो मर्ज़ी थी तेरी
मोहब्बत का मेरे यूँ सौदा न होता

बात ऐसी नहीं भूल जाऊं मैं सब कुछ
याद करने को तू अपना तो होता
क्या राज़ जाने दफ़्न दिल में रखे थे
एक बार मुझसे कह दिया तो होता

गम नहीं मुझे और गम भी है शायद
हाल दिल का तेरे दिखाया तो होता
तू दूर था सही मैं अंजान हो बैठा
दूर से सही रिश्ता निभाया तो होता

जब पता चला तू चल दिया अकेले
याद कर के मुझे तूने देखा तो होता
मैं दुश्मन नहीं था याद भी ना आई  
धड़कनों को तेरे संभाला तो होता

मैं दुश्मन नहीं था याद भी ना आई  
धड़कनों को तेरे संभाला तो होता 


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