STORYMIRROR

SHASHIKANT SHANDILE

Others

4  

SHASHIKANT SHANDILE

Others

जिहादी ......

जिहादी ......

1 min
12

चरागों को जलाएं रख

नए सपने सजाएं रख


यकीं कर ख़ुदपरस्ती का,

दुखों से जिद बनाएं रख!


गमों की बद्दुआ ले ले,

गमों से दिल लगाएं रख!


कहा तू हार मानेगा,

जलन दिल में बचाएं रख!


'जिहादी' बोल दे दुनिया,

बहस इतनी कराएं रख!



Rate this content
Log in