🥀🥀देव असुर स्वभाव🥀🥀
🥀🥀देव असुर स्वभाव🥀🥀
है मृत्यु भूमि यहीं देव असुर भी यहीं
है स्वर्ग भी यहीं है नर्क भी यहीं,
अभाव भी यहीं है आनंद खुशी भी यहीं
धर्म अधर्म यहीं सत्य भी यहीं।
सुना है स्वर्ग में है देवताओं का निवास
नर्क में पापियों का होती आवास,
फाड़कर देखो आँखों में मिलेगा सन्धान
करते धर्मात्मा पापियों निवास।
है भूमि में हमारी असीम शक्ति भाव
यही कृष्णराम की पवित्र भूमि,
पुरीधाम है यहां विश्वनाथ धाम यहां
है भारत धामों की पवित्र भूमि।
भरे पड़े हैं खनिजों के बड़े बड़े पहाड़
देश के लिए है अति उपकारी,
दाता से देवता बनता मृत्युलोक में भी
दानों से करते कार्य हितकारी।
कितने साधुओं जन्मे भारतवर्ष में
प्राप्ति की है यहाँ देवत्व शक्ति
बुद्धदेव गांधी विवेकानंद सुभाष
विश्व में गुंजती नर देवशक्ति।
दिये राजपाट राजा हरिश्चन्द्र अन्यको
राजसिंहासन भी खुशी से दान
दानी कर्ण दिये पुत्र को काटकर दान
इतिहास है भारत का महान।
देवत्व में भरी पड़ी है यह मृत भूमि
दानव प्रवृत्ति अति दुःखदायी
है भलेकार्यों में देवत्व का यहां आसान
पापियों करते हैं अति अन्यायी।
है भूमि में आसीन काम क्रोध लोभ यहां
भरी पड़ी यहां गर्व अहंकार
करते पापी यहां पाप कर्म नित्य सारी
नर्क द्वार हैं ये भाई अधिकारी।
कंस दुर्योधन जैसे पापियों भरमार,
होगा विनाश उनका सुनिश्चित
अल्पायु होगे ये ही मृत्युलोक में
कहाँ है उनमें ज्ञान कर्म भक्ति।
देवासुर भाव यहां है मनुष्य जीवन
कर्तव्य कर्म ज्ञान है जरूरी
भक्ति प्रेम श्रद्धा उत्पत्ति अन्तर में
भाई है देश होगी अलकापुरी।
