देना माँ वरदान
देना माँ वरदान
हे! देवी नारायणी,
जग की पालनहार।
नव-दिन के नव-रूप की,
महिमा अपरम्पार।।
घर-घर में होती रहे,
माँ की जय-जय कार।
राग-रंग दुख-क्रोध में,
माँ के रूप हजार।।
यही विनय मेरी सुनो,
देवी तुम करतार।
नारी के हर रूप का,
मान करे संसार।।
असुर शक्तियाँ आज भी,
करती हैं उत्पात।
हर कोई भयभीत है,
जाने कब हो घात।।
गली-गली में घूमते,
दुष्कर्मी अनजान।
नन्ही-नन्ही जान के,
प्यासे सब हैवान।।
रोज-रोज किस्से नए,
करते माँ भयभीत।
नारी के सम्मान की,
भूल गए सब रीत।।
नारी खुद नारायणी,
कभी न माँगे भीख।
माँ काली के रूप में,
यही सनातन सीख।।
आदि अंत आँचल पले,
बरसाती है प्यार।
करुणा की सरिता वही,
उसमें ही संहार।।
कोमल है कायर नहीं,
नारी इतना जान।
खुद अपनी रक्षा करे,
माँ देना वरदान।।
