देखो कैसा कोरोना काल आ गया
देखो कैसा कोरोना काल आ गया
कल्पना से भी परे, कठिनता से भरे।
सपने सारे बिखरे पड़े, करे जख्म हरे।।
देेखो कैसा कोरोना काल आ गया।।१।।
ना तो ट्रेन चले, ना तो प्लेेन चले।
ना ही बस चले, ना ही ऑटो चले।।
देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।२।।
सड़कें सुने पड़े, कार्यालय खाली पड़े।
हर कोई घर पर रहे, गम सारे पीते रहे।।
देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।३।।
कितनों का व्यापार डूबा, सारा रोजगार गया।
शेयर मार्केट टूटा, पैसा भी सारा लूूट गया।।
देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।४।।
मनोबल भी गिरा, शक्ति बल क्षीण हुआ।
किस्मत भी फूूूूटे, सपने सारे हीं टूूूटे।।
देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।५।।
अब भी आशा है लगी, मन कि विश्वास जगी।
ये जंग भी जितेंंगें हम, हौसले आत्मबल से भरी।
देेेखो कैसा कोरोना काल आ गया।।६।।
