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Mukesh Kr Mishra

Tragedy

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Mukesh Kr Mishra

Tragedy

देखो कैसा कोरोना काल आ गया

देखो कैसा कोरोना काल आ गया

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कल्पना से भी परे, कठिनता से भरे।

सपने सारे बिखरे पड़े, करे जख्म हरे।।

देेखो कैसा कोरोना काल आ गया।।१।।


ना तो ट्रेन चले, ना तो प्लेेन चले।

ना ही बस चले, ना ही ऑटो चले।।

देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।२।।


सड़कें सुने पड़े, कार्यालय खाली पड़े।

हर कोई घर पर रहे, गम सारे पीते रहे।।

देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।३।।


कितनों का व्यापार डूबा, सारा रोजगार गया।

शेयर मार्केट टूटा, पैसा भी सारा लूूट गया।।

देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।४।।


मनोबल भी गिरा, शक्ति बल क्षीण हुआ।

किस्मत भी फूूूूटे, सपने सारे हीं टूूूटे।।

देखो कैसा कोरोना काल आ गया।।५।।


अब भी आशा है लगी, मन कि विश्वास जगी।

ये जंग भी जितेंंगें हम, हौसले आत्मबल से भरी।

देेेखो कैसा कोरोना काल आ गया।।६।।


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