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Gyanendra Mohan

Abstract

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Gyanendra Mohan

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ढाई आखर बांचो तो

ढाई आखर बांचो तो

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पंख जले तो जल जाने दो, लौ के ऊपर नाँचो तो।

जीने का आनंद मिलेगा, ढाई आखर बाँचो तो।


हमने चाहा तो ये सारी

दुनिया ही अनुकूल लगी।

और हटाया मन इससे तो

बिल्कुल हमें फिजूल लगी।


लगन पपीहे की कहती है, अपनी चाहत जाँचो तो।


प्यार जहां है वहां कभी

शंकाएं जन्म नहीं लेतीं।

जीत-हार की दुविधाएं भी

हैं तकलीफ नहीं देतीं।


जिस जूनून में जला पतंगा, उस जुनून में झाँको तो।


मैंने जितना प्यार दिया है

उससे ज्यादा पाया है।

इसीलिये कहता हूँ तुमसे

 प्यार सदा रंग लाया है।


दीवानेपन की हद तक तुम, अपना मकसद आँको तो।


@ ज्ञानेन्द्र मोहन 'ज्ञान'


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