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PRATAP CHAUHAN

Abstract

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PRATAP CHAUHAN

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दौलत की लत

दौलत की लत

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बाप हो या बेटा पत्नी हो या बहना,

सभी को चाहिए दौलत और गहना।

बर्दाश्त नहीं किसी को कष्ट सहना,

कोई नहीं चाहता अब साधारण रहना।


इस दुनिया के हर कोने में जिसे देखो,

वही रुपए,डालर के पीछे भाग रहा है।

सुख-सुविधाओं की विकट लालसा में,

उसे पाने के लिए दिन रात जाग रहा है।


पैसे के मद में हर इंसान भाग रहा है,

एक ही गति से भागता ही जा रहा है।

दोगुनी कमाई हेतु निरंतर जाग रहा है,

और अपना बेहतर स्वास्थ्य त्याग रहा है।


धन कमाकर व्यक्ति धनवान मगर,

समाज में शिष्टाचार नग्न हो गया है।

मानवता का धर्म नष्ट होता जा रहा है,

रिश्तों का महत्व अब नगण्य हो गया।


इसी भागमभाग में अब इंसान की हर,

खुशियों व मनोरंजन पर धुंध छा गई है।

हर व्यक्ति सरकारी मुलाजिम बनना चाहता है,

इसलिए बेरोजगारी की अब आंधी सी आ गई है।


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