मधुशिल्पी Shilpi Saxena
Romance
बड़ी ही चतुराई से तीर नैनों के चलाए
एक-एक करके मेरे दिल पे सितम ढाए
भरी महफ़िल में भी बड़ी चतुराई से
तुने इज़हार-ए-इश्क किया हमसे
उनकी ये चतुराई दिल की कसम से
हमको अपना बना ले गई
हिंदी दिवस
मेरा भारत
माँ
मिट्टी का इंस...
देरी
जब सब बदल जाए
कही अनकही
गहराई प्रेम क...
लेखन
इन भोली आंखों पर कौन नहीं मरेगा तुझसे प्यार भला कौन नही करेगा इन भोली आंखों पर कौन नहीं मरेगा तुझसे प्यार भला कौन नही करेगा
लेकिन कभी वक़्त बेवक़्त तुम्हें सीने से लगा लूं तो समझ जाना तुम लेकिन कभी वक़्त बेवक़्त तुम्हें सीने से लगा लूं तो समझ जाना तुम
यह कहते हैं कि तुम इन्हें याद नहीं करते, यह कहते हैं कि तुम इन्हें याद नहीं करते,
नहीं दिल रहा अब वश में हमारे कि हम ग़ैर के हो गए हैं॥ नहीं दिल रहा अब वश में हमारे कि हम ग़ैर के हो गए हैं॥
सुख दुःख साथ हम ! सदा के लिये रखते ! परेशानियाँ दो हाथ, आनंद से है चखते सुख दुःख साथ हम ! सदा के लिये रखते ! परेशानियाँ दो हाथ, आनंद से है चखते
मेरी अनुपस्थिति में जो चारदीवारी काट खाए तो सार्थक है… मेरा होना कोई सरगम…तुम्हारे मेरी अनुपस्थिति में जो चारदीवारी काट खाए तो सार्थक है… मेरा होना कोई...
सुबह तेरी तस्वीर को सीने पे रख के सो गया। सुबह तेरी तस्वीर को सीने पे रख के सो गया।
सच है , मैं बेवफा नहीं हूँ खुदा की कसम वक्त लग सकता है तुम आँसुओं को मत बहाना।। सच है , मैं बेवफा नहीं हूँ खुदा की कसम वक्त लग सकता है तुम आँसुओं को मत बहाना...
मुख चन्द्र तुम्हारा देखने को, नैन तरसते हैं, स्मृति में तुम समा चुकी, अश्रु बरसते। मुख चन्द्र तुम्हारा देखने को, नैन तरसते हैं, स्मृति में तुम समा चुकी, अश्रु...
वो मुझे समझने लगता है, मैं उसे जानने लगती हूं, मैं उसके दिल में अपना एक घर बनाती हूं.. वो मुझे समझने लगता है, मैं उसे जानने लगती हूं, मैं उसके दिल में अपना एक घर बन...
इक सहमी सहमी सी आहट है, इक महका महका साया है। इक सहमी सहमी सी आहट है, इक महका महका साया है।
नैनों की खिड़की से दिल तक जाता है रास्ता यदि आकर्षण ना हो तो प्यार से कैसा वास्ता। नैनों की खिड़की से दिल तक जाता है रास्ता यदि आकर्षण ना हो तो प्यार से कैसा व...
तुम मेरे सपनों कि किताब हो रोज रोज तुमको ही पढ़ना चाहती हूं मैं हर बार, तुम मेरे सपनों कि किताब हो रोज रोज तुमको ही पढ़ना चाहती हूं मैं हर बार,
मेरी भूख, प्यास, अन्तहीन यादों का सिलसिला हो तुम, कैसे बताऊँ तुम्हें ! मेरी भूख, प्यास, अन्तहीन यादों का सिलसिला हो तुम, कैसे बताऊँ तुम्हें !
जो लफ़्ज़ों में बयाँ न हो सकें, उनका प्रेम इतना गहरा है,, जो लफ़्ज़ों में बयाँ न हो सकें, उनका प्रेम इतना गहरा है,,
अब बड़ी सहज की बात करूँ क्या? वो दूर होकर भी सताता रहा । अब बड़ी सहज की बात करूँ क्या? वो दूर होकर भी सताता रहा ।
या राहों में जो रोशनी भर दे क्या वो आफ़ताब हो तुम? या राहों में जो रोशनी भर दे क्या वो आफ़ताब हो तुम?
देखा जब हम अकेले नहीं थे डूबने वाले हमसे दीवाने और भी थे यहाँ छटपटाने वाले देखा जब हम अकेले नहीं थे डूबने वाले हमसे दीवाने और भी थे यहाँ छटपटाने वाले
मैं बहुत परेशां हूँ, उसको मनाने में ! जो मुझसे वो कुछ सच कहते नहीं मैं बहुत परेशां हूँ, उसको मनाने में ! जो मुझसे वो कुछ सच कहते नहीं