चोरी -चोरी चुपके -चुपके
चोरी -चोरी चुपके -चुपके
*विधा:-* विष्णु पद छंद गीत
*विधान:-* 16/10
*पदांत:-* 112
चोरी- चोरी चुपके-चुपके,बात सही कहना।
तू है मेरी दिल की रानी,कहते ही रहना।
प्रेम कलश बन जाना तुम भी,समझ सभी अपने।
आज सभी सच हो जाएंगे ,देखें जो सपने।।
प्यार अभी स्वीकार करो तुम,आह नहीं सहना।
चोरी-चोरी चुपके-चुपके,बात सही कहना।।
घर के आँगन सजे रहेंगे,कलियाँ तुम चुनना।
जो चाहोगे मिल जायेगा,बीज सही बुनना।।
लहर सुनामी हो कितना भी,अविरल तुम बहना।
चोरी-चोरी चुपके-चुपके,बात सही कहना।।
देख डगर है बड़ा कठिन ही,कभी नहीं रुकना।
रोकेंगे दुख के बादल भी, कभी नहीं झुकना।।
बॉंध कफन अब पहन चलो तुम ,प्रेम रत्न गहना।
चोरी-चोरी चुपके-चुपके,बात सही कहना।।

