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डॉ. प्रदीप कुमार

Inspirational

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डॉ. प्रदीप कुमार

Inspirational

चंद्रयान चांद पर

चंद्रयान चांद पर

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दुनिया आज स्तब्ध है कि भारत ये क्या कर गया!

रूस जहां फेल हुआ, वहां भारतीय यान उतर गया,

रोम-रोम पुलकित हुआ हर सच्चे भारतीय का, 

हारकर जीतने वाला आख़िर बाज़ीगर बन गया।

मेहनत, लगन, विश्वास और सब्र का संगम अटूट था,

टेढ़ा-मेढ़ा सफर था मगर निशाना इसका अचूक था।

सीधी राह पर तो भीड़ थी, भारत उधर नहीं गया,

उत्तरी ध्रुव पर उतरना आसान था शायद, 

तभी हमने दक्षिणी ध्रुव चुना।

टकटकी लगी रही सबकी चंद्रयान जिधर-जिधर गया,

अपना कार्य पूरा कर फिर वो विक्रम से अलग हुआ।

नाम के अनुरूप ही विक्रम ने प्रण लिया, 

चुपचाप चांद पर उतर, जग में शोर मचा दिया।

साइकिल से शुरू हुआ सफ़र आज चांद तक पहुंच गया, इसरो ने वो कारनामा किया, 

जो कोई देश न कर सका।

बधाई सारी टीम को, 

हमारा सिर जिसने गर्व से ऊंचा किया, 

सपना करोड़ों देशवासियों का 

शाम ढलते-ढलते पूरा किया।

अब तक चंदा दूर था हमसे, 

अब वहां आना-जाना शुरू हुआ, 

राखी पर्व से पहले जैसे भाई-बहन का मिलन हुआ।

तालियों की गड़गड़ाहट ने ही सारा किस्सा सुना दिया,

हम विश्वगुरु ऐसे ही नहीं हैं, पूरी दुनिया को बता दिया।


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