STORYMIRROR

Jai Prakash Pandey

Tragedy

3  

Jai Prakash Pandey

Tragedy

चिठिया नहीं भेजी

चिठिया नहीं भेजी

1 min
185

ग्राम विकास

हुआ है कितना

घबराओ न 

बताओ दो मुन्ना


सड़क बनी है 

बीस बरस से

मोटर कबहुं 

नहीं आई


गांव के गेवड़े

खुदी नहरिया

बिन पानी के

शर्मायी घबराई

टपकत रहो


मदरसा कब से

धूल धूसरित

भई पढाई

कोस कोस से

पियत को पानी 

और ऊपर से 

खड़ी चढ़ाई 


बिजली लगत 

रही बरसों से 

पे अबहूं तक

लग नहीं पाई 

तुम्हें लिखो है 

बतलईयो न 


बे का जाने 

पीर पराई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy