Jai Prakash Pandey
Tragedy
धूप है कि चिलचिलाती
भूख है फिर कुलबुलाती
जीवन भर की चाकरी
पर पटती नहीं उधारी
सुख चैन छिना कैसी तरक्की
मंहगे गुड़ चने में फंसी बेबसी।
बसंती बयार
हंसते रहो
खोने का दर्द
पहचान का संकट
हिलडुल भय
ग्राम विकास
प्रेरणा
राजनीति के ती...
प्रेम का एहसा...
गरीबी
कितने अपनों को उड़ा गई, यह कैसी हवा चली, देखो!! कितने अपनों को उड़ा गई, यह कैसी हवा चली, देखो!!
अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है। अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है।
नौकरी में, जिंदगी भी साली, एक्सल पर,करते काम। नौकरी में, जिंदगी भी साली, एक्सल पर,करते काम।
मैं तो एक वैश्या हूं, और वैश्या ही कहलाऊंगी जिस्म बेचकर ही, खुद को जिन्दा रख पाऊंगी। मैं तो एक वैश्या हूं, और वैश्या ही कहलाऊंगी जिस्म बेचकर ही, खुद को जिन्दा रख ...
मरते रहे मरीज़, अव्यवस्थाओं का शोर था, ये देश रो रहा था,बस तूफानों का दौर था. मरते रहे मरीज़, अव्यवस्थाओं का शोर था, ये देश रो रहा था,बस तूफानों का दौर था.
हे प्रकृति की मासूम प्रतिनिधि! हम तुम्हारे अपराधी हैं.. हे प्रकृति की मासूम प्रतिनिधि! हम तुम्हारे अपराधी हैं..
अपना पट शीघ्र न खोलूँगी कुछ मुझको तो मनाये वो अपना पट शीघ्र न खोलूँगी कुछ मुझको तो मनाये वो
'जीवधारी देश', ख़ुद को मानते हैं राज, सत्ता सब बदलना चाहते हैं। 'जीवधारी देश', ख़ुद को मानते हैं राज, सत्ता सब बदलना चाहते हैं।
कानून अब जी हजूरी की भाषा के अतिरिक्त कुछ नहीं। कानून अब जी हजूरी की भाषा के अतिरिक्त क...
चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है। चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है।
राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत ! राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत !
इबादत में हमारी असर नहीं रही या ईश्वर ने आँखें बंद कर रखी है। इबादत में हमारी असर नहीं रही या ईश्वर ने आँखें बंद कर रखी है।
कुछ बीती बातें हैं मन में, कब से जी रहा था कल में। कुछ बीती बातें हैं मन में, कब से जी रहा था कल में।
इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे। इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे।
तुम किसे छोटी सी बात कहते हो? तुम किसे छोटी सी बात कहते हो?
कुछ विनष्ट करते हैं और सृष्टि तटस्थ रहती है! कुछ विनष्ट करते हैं और सृष्टि तटस्थ रहती है!
है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं। है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं।
मैं नहीं जाना, प्रभुजी तेरी दुनिया में। नज़रों से तीर छूटेंगे मैं , ... मैं नहीं जाना, प्रभुजी तेरी दुनिया में। नज़रों से तीर छूटेंगे मैं , ...
धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल। धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल।
मुझे लगता है यह जीवन रंगमंच है और मैं बस एक कुशल अभिनेत्री हूँ। मुझे लगता है यह जीवन रंगमंच है और मैं बस एक कुशल अभिनेत्री हूँ।