STORYMIRROR

Jai Prakash Pandey

Comedy

3  

Jai Prakash Pandey

Comedy

राजनीति के तीतर

राजनीति के तीतर

1 min
398

तीतर के दो आगे तीतर,

तीतर के दो पीछे तीतर,

बढ़ ना पाये तीनों तीतर। 

कुंठित रह गये भीतर-भीतर।


बढ ना जाये अगला तीतर,

खींच रहा है पिछला तीतर।

बाहर खूब दिखावा करते,

कुढ़ते रहते भीतर भीतर।

जहां खड़े थे पहले तीतर।

वही खड़े हैं अब भी तीतर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Comedy