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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Tragedy

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Tragedy

चिंगारी

चिंगारी

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जिला जालौन में 10 अगस्त 1963 ई. को एक चिंगारी ने जन्म लिया ।

भारत ही नहीं पूरे विश्व में निज नाम ‘फूलन देवी’ महान किया ।।


किस्मत फूटी पर कभी स्वाभिमान न टूटा,

स्वजनों ने ही फूलन के सपनों को लूटा ।

पुश्तैनी संपत्ति हेतु ताऊ-चाचा हैवान बने,

अपने-पराये सबके ताने फूलन खूब सुने।।


नाबालिक फूलन बेचारी बाल विवाह की शिकार हो गई ।

अधेड़ उम्र आदमी के चंगुल में प्यारी गुड़िया थमा दी गई ।।


बलात्कार और अत्याचार सहे कोमल फूलन,

विधि का विधान कह सब सह गई फूलन।

अपनों का अत्याचार और परायों का भेदभाव,

निडर फूलन देवी ने बगावत का खेला दाव ।।


झूठें केस में फूलन देवी को अपनों ने ही फंसा जेल भिजवाया ।

जेल में खाकी ने अपना मुंह काला कर फूलन पर जुल्म ढहाया ।।


बेईमान चाचा बना हैवान,

इंसान के वेश में था शैतान ।

पाप मिटाने दुर्गारुप बनी फूलन,

इंसाफ की तकदीर लिखी फूलन।।


एक रात डाकू बाबु गुज्जर की नियत में आया खोट ।

बेचारी फूलन के स्वाभिमान को दरिंदे ने पहुंचाई चोट ।।


विक्रम मल्लाह पता चली यह बात,

खून खौल गया, जो एक थी जात ।

बाबु गुज्जर को जहन्नुम पहुंचाया,

फूलन के साथ एक नया गैंग बनाया ।।


 बेहड़ में फूलन देवी रणचंडी दुर्गा बन लगी दहाड़ने।

थर-थर कांपी चंबल, विरोधी सारे लगे अब घिघियाने ।।


जिन-जिन जुल्म ढहाया फूलन,

अपने हों या पराए फूलन ।

एक-एक कर सबको दिया प्रसाद,

फूलन की गोली का दुश्मन चखें स्वाद ।।


श्रीराम और लालाराम के भीतर जातिवाद का कीड़ा काटा ।

खाकी से मिल विक्रम -फूलन गैंग की राह में बो दिया कांटा ।।


हाय री ! किस्मत फूलन,

गैंग में हो गई भारी टूटन ।

ऊंची जात के राक्षस,

लगे करने हास-परिहास ।।


घायल फूलन देवी की इज्जत लूटी सब ने बारी-बारी ।

निर्वस्त्र चंबल की शेरनी, देख रही मूक हो दुनिया सारी ।।


साहस वीरता की मूरत,

रणचंडी दुर्गा की सूरत ।

एकबार पुनः उठ थामी बंदूक,

फिर से गरज उठी बंदूक ।। 


बेहमई में बाइस दरिंदों को एक पंक्ति में खड़ा कर गोलियों से भून दिया ।

फूलन के हृदय को मिली सांत्वना, जाति के ठेकेदारों को सबक जो सिखा दिया ।।


शासन और प्रशासन थर-थर कांपा,

फूलन ने हर शोषणधारी को नापा ।

संपूर्ण जगत में बैंडिट क्वीन पहचान हो गई,

निबलों -बिकलों के लिए फूलन महान हो गई ।।


निड़र, बहादुर, सहनशीलता का जीवंत उदाहरण शेरनी फूलन ।

छः शर्तों के साथ गांधी -दुर्गा की तस्वीर के सम्मुख किया आत्मसमर्पण ।।


1994 ई. में सभी आरोपों से मुक्त हुईं,

फिर समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार हुईं।

मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ीं,

और संसद भवन की सीढ़ियां सिर उठा चढ़ीं ।।


निज भूखे-गरीब सोए समाज को जगाने का बीड़ा उठा लिया फूलन ।

गांव- गांव, बस्ती -बस्ती अलग जगा, सोए समाज को जगा रही थीं फूलन ।। 


एक बार पुनः अपनों ने ही दगा किया,

गीदड़ शेर सिंह रंडवा को भेद दिया ।

25 जुलाई 2001 को धोखे से 

गीदड़ शेर सिंह रंडवा ने गोली मार दिया ।।


कुछ इस तरह समाज की एक चिंगारी हमेशा- हमेशा के लिए बुझ गई ।

जागो समाज के लोगों जागो, दोहराओ न उस भूल को जो हमसे पहले हो गई ।।



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