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Mukesh Bissa

Inspirational

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Mukesh Bissa

Inspirational

छूना है आसमान

छूना है आसमान

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चाहती हूँ उड़ना उन्मुक्त गगन में

भरना चाहती हूँ उड़ान ऊँची

प्रगति के आसमान में करना है विचरण

जहां हो ऐसा जिधर न कोई


देखे बुरी नज़र से

माहौल हो ऐसा जिधर 

न ही नोचे तन कोई

विचरण करूँ ऐसे गगन में


जहाँ हर कोई लगे अपना सा

न हो बैर किसी का किसी से

हर जगह बन जाए बसेरा

हो मेल सबका सभी से


भूल कर भी न आए

विचार दुश्मनी का

है सपना यही जिसे पाने का

अरमान यही दिल में बसाने का

ऐसा हो जहाँ अपना सा।


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