STORYMIRROR

Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

3  

Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

छत पर एक लड़की रहती थी

छत पर एक लड़की रहती थी

1 min
206


 छत पर एक लड़की रहती थी,

 टकटकी लगाए , पलकें बिछाए

 मेरी राह देखते- देखते मानो वह रह बन जाती थी ,

आज छत तो वहीं है, मगर वह लड़की नहीं है !

 हां ! वही लड़की जो छत पर रहती थी !

मेरी राह में अपनी राह भुलाए,

मेरी एक झलक की खातिर अपनी पलकें बिछाए ..

 छत पर एक लड़की रहती थी ...।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance