STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

2  

Surendra kumar singh

Abstract

चैन भी है

चैन भी है

1 min
89

चैन भी है

शिकायतें भी हैं

चाहत का जन्मना भी है

चाहत का पिघलना भी

मंसूबे का टूटना भी

मंसूबे का बंधना भी

भरोसा भी

भरोसे का टूट कर

बिखरना भी


समय के पटल पर

जीवन की यह दशा

जैसे संसद में कोई

शक्ति परीक्षण।

यकीनन न कोई हारा है

न कोई जीता है

फिर भी मनुष्य दुखी है

हारने की तरह

खुश है जितने की तरह


सुना था

जीवन पानी का बुलबुला है

और यहां तो बिना पानी

का बुलबुला है।

शुक्र है

चैन भी है

और शिकायतें भी हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract