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Kunda Shamkuwar

Abstract Fantasy

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Kunda Shamkuwar

Abstract Fantasy

चाँद सूरज वाली दुनिया

चाँद सूरज वाली दुनिया

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न जाने कितने कवियों ने चाँद पर कविताएँ लिखी....

सदियों से चाँद यूँहीं कवियों पर मेहरबान होता रहा है.....

कभी कवि को चाँद में एक नटखटपन नज़र आता है.....

हर बार सुंदरता बखान करने वह चाँद की तरफ़ ही देखता है.....

कवि भी अजीब होते हैं

कवी चाँद के संग उपमाओं का खेल खेलते है...

हाँ ! उपमा !!

कभी वे चाँद को ताकाझांकी करने वाला करार देते है.....

कभी वे चाँद को गवाही देने की बात करते है....

कभी उन्हें चाँद की सूरत में झोंपड़ी के ग़रीब की गोल रोटी दिखती है.....


कवि चाँद के क़सीदे पढ़ते हुए कभी सूरज को नही भूलता है.....

किसी भी क्रांति में उसे सूरज की आग नज़र आती है.....

और हर क्रांतिकारी में एक एक सूरज !

कवि भी क्या करे ? उसे भी तो इसी दुनिया मे रहना होता है.....

हाँ, उसी दुनिया में जो सूरज के चारो ओर घूमने से होती है.....

इस दुनिया मे दिन का सुल्तान सूरज होता है.....

और रात में चाँद मालिक.....


कवि की नज़रों में दुनिया रंगबिरंगी होती है....

वह अपनी कल्पनाओं की दुनिया मे मस्त रहता है......

लेकिन हक़ीक़त में दुनिया इससे उलट होती है.......

जिसमे हर कोई अपने नफ़े नुकसान की पर्वा करता रहता है.....

कल्पना की दुनिया मे रहने वाला कवि क्या जाने नफ़ा नुकसान ?

वह फिर लौट जाता है अपनी उस चाँद, तारे और सूरज वाली दुनिया में........


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