चाँद चलता है
चाँद चलता है
आँखों में जो नमी नहीं आती
याद तुमको कभी नहीं आती।
तुमको पाया ऐसा लगा मैं हूँ
पास क्यूँ ज़िन्दगी नहीं आती।
कैसे ग़ालिब से हम ग़जल सीखें
हमकों तो शायरी नहीं आती।
चाँद चलता हैं साथ देने के लिए
फिर भी क्यूँ चाँदनी नहीं आती।
मुस्कुराकर देखा है साथ मैंने
हमसफ़र को हँसी नहीं आती।
तुम जो चाहों माँग लो हमसे
"नीतू"को दिल लगी नहीं आती।
गम का जो अंधेरा नजर आया
दिल मे बरसों खुशी नहीं आती।

