STORYMIRROR

Shivansh Jha

Tragedy Classics Inspirational

4  

Shivansh Jha

Tragedy Classics Inspirational

चाँद और रोटी — असमंजस

चाँद और रोटी — असमंजस

2 mins
26

यहाँ चाँद सपने हैं और रोटी वर्तमान।
 किन्तु चाँद तो अस्पृश्य है और रोटी अत्यंत महान।

असमंजस तो यह है कि यदि चाँद अस्पृश्य और रोटी महान!!
 तो क्या सपनों के पीछे भागना व्यर्थ है
 या रोटी तोड़ना पाप?

असमंजस तो यह भी है
कि यदि रोटी महान है तो भोजन फिक्ता कैसे है,
 बाज़ारों में बिकता कैसे है…
 कोयला काला कैसे है और हीरा चमकता कैसे है।

किन्तु एक क्षण ठहरो…
 रोटी तोड़ना तो पाप था न!
 परंतु असमंजस तो यह है कि
 रोटी हमें तोड़ती है या हम रोटी को?
 क्योंकि यदि रोटी हमें तोड़ती है तो पेट कैसे भरते हैं,
 और यदि हम रोटी को तोड़ते हैं तो भूखे कैसे मरते हैं…

एक असमंजस और—

कि यदि चाँद अस्पृश्य है
 और वही सपने—तो किसके लिए जिएँ?
 यदि हम चाँद के पीछे भागे
 और वह अस्पृश्य है,
तो अर्थात वह हमारा नाश करेगा,
 और नाश करने के लिए
 चाँद ने हमें
 या शायद हमने चाँद को स्पर्श किया…

यदि चाँद ने हमें स्पर्श किया
 और रोटी ने हमें तोड़ दिया…
 तो क्या चाँद अस्पृश्यता में मानता है
 और रोटी अत्याचार में?

यदि हाँ!!
 तो चाँद अस्पृश्य कैसे हुआ
 और रोटी महान कैसे है…

यदि रोटी महान है तो वह अमूल्य हुई—
 उसका मोल किसने लगाया?
 और चाँद अस्पृश्य है
 तो मेघ और तारों को
 उस तक किसने पहुँचाया?

यदि यह सब प्रकृति और समय की देन है
 तो क्या वे भी पक्षपाती हैं…


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy