चालीस की उमर
चालीस की उमर
चालीस की उमर
खतरों की डगर
हर पल रखना
है बस सबर
नहीं तो टूट
सकता मुश्किलों
जा कहर
खाने में शुरू करो
परहेज
नहीं तो चक्कर काटो
बैद्य के
योगा से करो दोस्ती
जिससे जिंदगी में
बनी रही मस्ती
थोड़ा पैदल भी चलो
जिससे मोटापा रहे दूर
हर काम खुद करो
किसी से अपेक्षा न करो
न उम्मीद टूटेगी
न दर्द होगा
न चिंता होगा
मन खुश रहेगा
सब ठीक रहेगा
मुश्किल डगर
का सफर भी
आसानी से कट जायेगा।
