चाहती हूँ मैं
चाहती हूँ मैं
चाहत को इबादत में बदलना चाहती हूँ मैं,
तुझे तेरी इजाज़त के बगैर अपना बनाना चाहती हूँ मैं !
ताउम्र शिकायत न हो तुझसे दूरी की कभी,
अपने दिल की धड़कनों में, बसाना चाहती हूँ मैं..
कभी महसूस न हो,
मुझे कमी तेरी,
अपने ही अक्स में,
तेरा वजूद देखना चाहती हूँ मैं......

