STORYMIRROR

Nikhil Kumar

Romance

4  

Nikhil Kumar

Romance

दो पल ख़ुद के लिए

दो पल ख़ुद के लिए

1 min
409

जरा वक्त निकाल लिया करो जिंदगी की जद्दोजहद से

मिलते हैं ना कोई शाम किसी पहर कहीं दूर फुर्सत से

कुछ अपनी सुनाना कुछ हम अपनी सुनायेंगे 

जिंदगी की उलझनें साथ मिलकर सुलझाएंगे

खुलकर दिल की बातें करेंगे 

जिम्मेदारियों का बस्ता कंधे से उतार

अपने अंदर दबे बच्चे को बाहर आने देंगे 

खुद को दुनियां की नज़र से नहीं देखेंगे

कोई क्या कहेगा ये भी नहीं सोचेंगे

उस पल हम ख़ुद को जिएंगे

कभी वक्त चुरा लाना थोड़ी सी चुपके से

हम कहीं खुले आसमान में मिलेंगे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance