Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Nikhil Kumar

Romance

4.0  

Nikhil Kumar

Romance

आखिरी मुलाकात/आख़िरी अल्फ़ाज़

आखिरी मुलाकात/आख़िरी अल्फ़ाज़

1 min
340


कुछ तुम कहो कुछ हम कहें

कुछ देर तलक हम साथ रहें

फिर जाते वक़्त तुम जरा मुस्कुरा देना

घर जाकर मेरे नाम की एक दीपक जला देना

फिर एक बार मुझे याद कर लेना

उस दीपक के पास अंधेरा होगा और

चारो तरफ उजाला दे रहा होगा वो दीपक,

मेरी जिन्दगी कुछ ऐसी ही रही,

कोई चेहरे की झूठी मुस्कुराहट भाप ना सका

दर्द की गहराई क्या थी कोई नाप न सका

वैसे तो हर रिश्ता मैंने एक तरफा ही निभाया

जब अपनों की तलाश की तो सिर्फ तुम्हे ही पाया

कुछ चंद सांसे थामे हुए तुम्हे अपनी कहानी बता रहा हूं

खयाल रखना अपना मै दुनिया छोड़े जा रहा हूं!



Rate this content
Log in