Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Asha Pandey

Drama


2.4  

Asha Pandey

Drama


चाबी

चाबी

1 min 13.5K 1 min 13.5K

तब होता था

हमारे घर में एक ही बक्सा

एक ही ताला

एक ही चाबी

घर से कहीं जाने पर सबके

निकाल लिया जाता था बक्से से ताला

बंद कर दिया जाता था

घर के किवाड़ में !


हम आश्वस्त रहते थे

घर की सुरक्षा के प्रति

एक ही ताले में थी वह शक्ति

कि गायब नहीं होता था कुछ भी !


अब हैं हमारे घर में कई बक्से

कई आलमारियां

कई किवाड़ कई-कई ताले

और चाबियाँ भी हैं

हमारे पास कई-कई !


हम चटकाते हैं सब बक्सों

और सब कमरों में ताले

चाबियाँ रखते हैं संभाल के

पर न जाने कैसे

सेंध पड़ गई है हमारे घर में

लूट लिया गया है प्रेम

जो मुख्य दौलत थी हमारे घर की !


अब प्रेम के लुट जाने के बाद

बचा ही क्या है हमारे घर में

जो चाबियों को

रखा जाये संभाल कर...!






Rate this content
Log in

More hindi poem from Asha Pandey

Similar hindi poem from Drama