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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

बुढ़ापे में तू मेरा ध्यान रखना

बुढ़ापे में तू मेरा ध्यान रखना

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बुढ़ापे में तू मेरा ध्यान रखनामें तेरा ध्यान रखूंगा

तू मेरे श्वेत केश पे हाथ फेरनामें तेरे हाथ फेरूंगा

तू मुझसे जब भी रूठेगी,मेरी हंसी उसीवक्त टूटेगी,

बीतती शाम में तू मुझे मनानामें तुझे मनाऊंगा,


बुढ़ापे में तू मेरा ध्यान रखनामें तेरा ध्यान रखूंगा

मुझे बेटे छोड़े दे,पोते छोड़ दे,किंचित गम न होगा,

तू मेरा साथ कभी न छोड़नामें तेरा साथ न छोडूंगा

जब भी बिछड़े,एक-दूजे से हमहाथ मे हाथ हो फिर निकले दम


तू मौत का चाहे कफ़न ओढ़नापर साखी मुझे भी साथ रखना

तू जब भी दुनिया छोड़ेंगी,पर ये वादा कभी न भूलेगी,

में तेरे साथ चलूंगा,तुझे अकेला न छोडूंगा,

तू जब सांसे तोड़े मुझे बोलनामें भी साथ मे सांसे छोडूंगा


बुढ़ापे में तू मेरा ध्यान रखनामें तेरा ध्यान रखूंगा

गम जीवन में कितने ही आये,ये दीया जब भी बुझने को आये,

तू मेरी परछाई बनना,में तेरा साया बनूंगा

तू इस दीये की ज्योति बनना,में तेरी बाती बनूंगा


बुढ़ापे में तू मेरी हीरोइन बननामें तेरा हीरों बनूंगा

जिंदगी का क्या,आज है कल नही,

हर जन्म तू ही मेरी पत्नी बनना,में भी तेरा ही पति बनूंगा

बुढ़ापे में तू मेरा ध्यान रखनामें तेरा ध्यान रखूंगा

हर बार तू ही मेरी महंदी बनना,में तेरी मेहंदी का साजन बनूंगा


दोनों बने एक दूजे की लाठी,बुढ़ापे में तेरा हाथ हो साथी,

उस वक्त भी वैसे ही चाहूंगा, जैसे पहली बार मिले थे जीवनसाथी

बुढ़ापे में तू मेरा ध्यान रखनामें तेरा ध्यान रखूंगा।


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