STORYMIRROR

Kuhu jyoti Jain

Abstract Inspirational

3  

Kuhu jyoti Jain

Abstract Inspirational

बुद्ध

बुद्ध

1 min
179

जो निरहंकारी बनूँ तो बुद्ध हो जाऊं

जो सम्यकधारी बनूँ तो बुद्ध हो जाऊं

जो सोच सकूं आत्मा को तन से पृथक  

जो सोच सकूँ देह को मन से अलग

जो छोड़ सकूँ प्रेम अपनी प्रियतमा का

जो तज सकूँ विलासिता से महल भरा

जो तप सकूँ आत्मा की शुद्धि में तो बुद्ध हो जाऊं

जो रम सकूँ असीमता की शक्ति में तो बुद्ध हो जाऊं

नहीं है सहज बुद्ध हो जाना 

स्व को परे कर पर को अपनाना

मैं नहीं हो पाऊँगी बुद्ध कभी

प्रेम मुझे नहीं तजने देगा कुछ भी



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract