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Ajay Prasad

Tragedy

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Ajay Prasad

Tragedy

बसुदैव कुटुंबकम

बसुदैव कुटुंबकम

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सपने टूटते हैं बड़ी खामोशी से

अपने लूटते हैं बड़ी खामोशी से ।


ज़र,जोरू,ज़मीन की ख़ातिर ही

रिश्ते छूटते हैं बड़ी खामोशी से ।


जिनसे करो उम्मीद मनाने की

वो ही रूठते हैं बड़ी खामोशी से ।


कुदरत का कहर,वक़्त की मार

हालात कूटते हैं बड़ी खामोशी से ।


समय के साथ ही हाथों से हाथ

अक़्सर छूटते हैं बड़ी खामोशी से ।



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